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Sunday, April 21, 2019

कहां चले गए हैं सारे कवि?

समय के चौराहे पर खड़ी सभ्यता
द्वेष की राह को निहार रही है।
ये कौन बताएगा हमें
कि उस पथ का शेष केवल शेष है?
अंतर्भास अन्तर के आभास से आएगा,
ये कौन समझाएगा इस पीढ़ी को
अपने सशक्त, कोमल, तीक्ष्ण, प्रेरक, स्नेही
पंक्तियों से?
कहां चले गए हैं सारे कवि?

Tuesday, April 02, 2019

मैं विकास हूं

मैं विकास हूं। मैं खो गया हूं।

बैठकर मेरे कांधों पर
पुत्र लाया था मुझे।
धर्म और राजनीति के संगम पर
स्नान कराया था मुझे।
फिर महत्वाकांक्षा के कुंभ में
छोड़ आया था मुझे।

Tuesday, June 07, 2011

दिल्ली किसकी है?

दिल्ली किसकी है?
किसीकी नहीं...
इसे अपना बनाना पड़ता है --
कुछ ज़ोर-ज़बरदस्ती से,
कुछ चपेट खाते हुए |
दिल्ली उसकी है जिसने नदी के बहाव को
मोड़कर तैरना सीखा;
जिसने मुस्कुराते हुए
टूटे शीशे पे चलना सीखा;
जिस ने सीखा की मेरी पहचान
एक शहर, एक पिन कोड से नहीं है;
मेरी पहचान मेरी सोच, मेरी ताकत से है|
मेरे लिए पूरी दुनिया दिल्ली है|